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“कला …. किसी कला गैलरी की संपत्ति नहीं है , यह कोई निश्चित स्थान की भी संपत्ति नही है, यह आपके जीवन का अंग है, आपके घर का अंग है । आपका घर ही सुंदरता का केंद्र है, यह संस्कृति का केंद्र है,तथा कला का भी केंद्र है. इन सबमें कोई अंतर नहीं है ।“
-(रुक्मिणी देवी)
अपने जीवन के दौरान जिसमें उनका सामना भारत के सांस्कृतिक तथा कलात्मक जगरण के रूप में हुआ है, रुक्मिणी देवि ने मूर्तियां वस्त्र, चित्र तथा तांबे के कई चीजों को एकत्रित किया है । ये सभी चीजें उनके दैनंदिन जीवनके हिस्से बन गए थे । |