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छात्र अध्यापक का औसत प्रति अध्यापक चार छात्र हैं, जिससे अध्यापक विद्यार्थी के बल एवम कमजोरी की पहचान कर सके । जहाँ कहीं विद्यार्थी को आवश्यकता हो वहाँ शिक्षक दुर्लभ विशिष्ट रागों और कृतियों को भी उन्हें सिखाते हैं । वे सभी महान संगीतज्ञ जिनमें वे गुरु भी सम्मिलित हैं ,जिन्होंने कलाक्षेत्र में कार्य किया जैसे -टाइगर वरदाचारियर, मैसूर वासुदेवाचारियार, बूदलूर कृष्णमूर्ति शास्त्री, तथा एम डी रामनाथनाअदि जिन्होंने यहाँ सिखाए जाने वाले संगीत की शिक्षण पद्धति को आकार व स्वरुप दिया, के बारे में अपने विद्यार्थियों को बताते हैं।नियमित श्रुति अभ्यास तथा विभिन्न रागों के आधारभूत अभ्यास को नियमित दोहरान से स्वर निर्माण जो वाक संगीत शिक्षण का महत्वपूर्ण भाग है कि शिक्षा दी जाती है । यह छात्रों को सही नोट्स उत्पन्न करने में मदद करती है । प्रत्येक विद्यार्थी को अन्य विषयों जैसे संगीत का सैद्धांतिक पक्ष, महान संगीतज्ञों के जीवन अध्ययन तथा संगीत से संबंधित शास्त्रों के अध्ययन क
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अतिरिक्त किसी एक वाद्ययंत्र का अभ्यास भी करना होता है । वे शैक्षिक भ्रमण के रूप में तिरुवैयारू तथा कर्नाटिक संगीत से संबंधित अन्य स्थानों पर जाते हैं। योग कलाक्षेत्र के सभी विद्यार्थियों को सिखाया जाता है । तथा संस्कृत, तमिल, तेलुगु इन तीन भाषाओं में से किन्हीं दो भाषाओं का अध्यनन करना अनिवार्य है । यदि कोई विद्यार्थी मुख्य विषय के रूप में वीणा, वायलीन, या मृदंग को चुनता है तब गायन उनके लिए अतिरिक्त विषय के रूप में होगा । इसके अलावा उनका पाठ्यक्रम उसी प्रकार होगा जैसे गायन के अन्य विद्यार्थियों का
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